एक बूँद

समुंदर की लहरों से निकल,
एक बूँद उड़ चली,
हवाओं के पंखों पर सवार,
बादलों में लिपटी,
पड़ाव ढूँढती,
उसके चिह्न खोजती

पहाड़ों, नदियों, झरनों,
खेतों, खलिहानों को
निहारती, सरहती,
वह गिरी
एक सूखी
धरा पर

उस हृदयहीन धरा में
समा गयी,
लुप्त होने लगी,
मानो उसका अस्तित्वा
मिटता जा रहा हो

अपनी स्वतंत्रता ढूँढती,
वह भटकने लगी|
अचानक लगा,
वह किसी अंतर में
उतरने लगी

हताश होती,
नदी के साथ बहने लगी,
आनमानी-सी,
थकती हुई|
उसकी बोझिल सासों ने
स्वयं को पाया
अपार जल समूह के
गर्भ में

ऐसी असीम शांति!
प्रतीत हो रहा था उसे,
बूँद हो कर भी
अपार जल समूह ही
तो थी वह!

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थमा हुआ शोर

खाली-से कमरे में,

बैठ मैं सोचा करती हूँ,

जब दिल यादों से भर जाता है,

तब वो कितना

खाली-खाली लगता है।

 

देख झरोखों से मैं जब

आसमान को तकती हूँ,

असीमित गगन वो नीला

छोटा-सा रह जाता है।

 

उस असह्य शोर के बीच,

जब मन व्याकुल हो

कुछ कहता है,

एक सन्नाटा-सा रह जाता है।

 

आँखें

वो गहरी, मादक आँखें
कुछ ढूँढती, कुछ पूछती
कुछ अचंभित, कुछ व्यथित, कुछ व्याकुल
मेरी आँखों में उतर गईं
समय थम गया
भूली-बिसरी स्मृतियाँ झाँकने लगीं
केवल दो मन थे
एक-दूसरे को पहचानते हुए
समझते हुए, समझाते हुए,
कुलाँचे भरते हुए, खिलखिलाते हुए
थमते हुए, जागते हुए
इस जीवन से परे भी
वही आँखें रह जाएँगी
मेरी आँखों में उतरती हुईं

बावरा मन – स्वानंद किरकिरे

बावरा मन देखने चला एक सपना

बावरे-से मन की देखो बावरी हैं बातें
बावरी-सी धड़कनें हैं, बावरी-सी साँसें
बावरी-सी करवटों से निंदिया दूर भागे
बावरे-से नैन चाहें, बावरे झरोखों से
बावरे नज़ारों को तकना

बावरे-से इस जहाँ में बावरा एक साथ हो
इस सयानी भीड़ में बस हाथों में तेरा हाथ हो
बावरी-सी धुन हो कोई, बावरा एक राग हो
बावरे-से पैर चाहें, बावरे तराने के, बावरे-से बोल पे थिरकना
बावरा मन देखने चला एक सपना

बावरा-सा हो अंधेरा, बावरी ख़ामोशियाँ
थरथराती लौ हो मद्धम, थरथराती मदहोशियाँ
बावरा एक घूँघटा चाहे, हौले-हौले बिन बताए, बावरे-से मुखड़े से सरकना
बावरा मन देखने चला एक सपना

कुछ बिछड़ी हुईं ग़ज़लें जो फिर मिलीं…

बात निकलेगी… (क़ाफील आज़ेर)

बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी

लोग बेवजह उदासी का सबब पूछेंगे
ये भी पूछेंगे कि तुम इतनी परेशान क्यों हो
उंगलियाँ उठेंगी सूखे हुए बालों कि तरफ़
एक नज़र देखेंगे गुज़रे हुए सालों की तरफ़
चूड़ियों पर भी कई तंज़ किए जाएँगे
काँपते हाथों पे भी फ़िकरे कसे जाएँगे

लोग ज़ालिम हैं हर इक बात के ताना देंगे
बातों-बातों में मेरा ज़िक्र भी ले आएँगे
उनकी बातों का ज़रा-सा भी असर मत लेना
वरना चेहरे के तासुर्र से समझ जाएँगे
चाहे कुछ भी हो सवालात ना करना उनसे
मेरे बारे में कोई बात ना करना उनसे

बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी

 

सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता-आहिस्ता…(अमीर मीनाई)

सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता-आहिस्ता
निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता-आहिस्ता

जवां होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा
हया यकलख्त आई और शबाब आहिस्ता-आहिस्ता

शबे-फुरक़त का जागा हूँ फ़रिश्तों अब तो सोने दो
कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता-आहिस्ता

सवाले-वस्ल पर उनको उदु का ख़ौफ़ है कितना
दबे होठों से देते हैं जवाब आहिस्ता-आहिस्ता

हमारे और तुम्हारे प्यार में बस फ़र्क है इतना
इधर तो जल्दी-जल्दी है उधर आहिस्ता-आहिस्ता

वो बेदर्दी से सर काटें अमीर और मैं कहूँ उनसे
हुज़ूर आहिस्ता, जनाब आहिस्ता-आहिस्ता

 

दिल में इक लहर-सी उठी है अभी…(मोहम्मद अब्दुल क़ादिर)

दिल में इक लहर-सी उठी है अभी
कोई ताज़ा हवा चली है अभी

शोर बरपा है ख़ाना-ए-दिल में
कोई दीवार-सी गिरी है अभी
कोई ताज़ा हवा चली है अभी

कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज हैं हम भी
और ये चोट भी नयी है अभी
कोई ताज़ा हवा चली है अभी

याद के  बे-निशान जज़ीरों से
तेरी आवाज़ आ रही है अभी
कोई ताज़ा हवा चली है अभी

शहर के बे-चिराग़ गलियों में
ज़िंदगी तुझको ढूँढती है अभी
कोई ताज़ा हवा चली है अभी

दिल में इक लहर-सी उठी है अभी

आवाज़

कहीं कोई आवाज़ सुनाई देती है
कभी लगता है वो पास आती है
और कभी बस एक गूँज-सी रह जाती है

कभी बुलाती-सी आवाज़ लगती है
कभी बोलती-सी जान पड़ती है
कभी रोकती-सी सुनाई देती है
कभी ठहरी-हुई-सी खामोशी है
कभी काँपती-सी सिसकी है
कभी कंपा देने वाली चीख लगती है

बहुत सोचती-हुई-सी यह आवाज़
कभी अपनी जान पड़ती है
कभी रब की आवाज़ लगती है

सुरीली अँखियों वाले – गुलज़ार की एक कविता

सुरीली आँखियों वाले
सुना है तेरी आँखियों से
बहती हैं नींदें
और नींदों में सपने
कभी तो किनारों पे
उतर मेरे सपनों से
आजा ज़मीन पे और मिल जा कहीं पे
मिल जा कहीं
मिल जा कहीं समय से परे
समय से परे मिल जा कहीं
तू भी अँखियों से कभी मेरे अँखियों से सुन

जाने तू कहाँ है
उड़ती हवा पे तेरे पैरों के निशान देखे
ढूँढा है ज़मीं पे छाना है फ़लक पे
सारे आसमाँ देखे
मिल जा कहीं समय से परे
समय से परे मिल जा कहीं
तू भी अँखियों से कभी मेरे अँखियों से सुन

Everytime I look into your eyes
I see my paradise
The stars are shining right up in the sky
Painting words of desire
Can this be real
Are you the one for me
You have captured my mind, my heart, my soul on earth
You are the one waiting for
Everytime I look into your eyes
I see my paradise
Stars are shining right up in the sky
Painting words of desire

होंठ में छुपके देख रहे थे
चाँद के पीछे, पीछे थे
सारा जहाँ देखा देखा ना आँखों में
पलकों के नीचे थे
आ चल कहीं समय से परे
समय से परे चल दे कहीं
तू भी अँखियों से कभी मेरी अँखियों की सुन

सुरीली अँखियों वाले सुना है तेरी अँखियों से